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[2026-01-12]राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने 2026 में राष्ट्रीय एकता के लिए धार्मिक नेताओं से मुलाकात की

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राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने आज दोपहर 12 बजे ब्लू हाउस में देश के प्रमुख धार्मिक नेताओं को नए साल 2026 के अवसर पर भोज और संवाद के लिए आमंत्रित किया। इस कार्यक्रम का नाम “धर्म के साथ राष्ट्र एकता की ओर” रखा गया है, जिसका उद्देश्य सामाजिक विश्वास की पुनर्स्थापना और राष्ट्रीय एकता के युगीन लक्ष्य को फिर से पुष्ट करना है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब कोरियाई समाज विभाजन और संघर्ष का सामना कर रहा है, और राष्ट्रपति विभिन्न धार्मिक समुदायों की बुद्धिमत्ता और अनुभव को सुनना चाहते हैं। यह कदम सामाजिक समरसता और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण है।

इस कार्यक्रम में बौद्ध धर्म के जोग्ये ऑर्डर के प्रमुख जिनवू, चोंटे ऑर्डर के प्रमुख डक्सू, और टैगो ऑर्डर के प्रमुख सांगजिन शामिल होंगे। ईसाई समुदाय से कोरिया चर्च फेडरेशन के अध्यक्ष किम जोंग-सेक, कोरिया क्रिश्चियन चर्च काउंसिल के महासचिव पार्क स्युंग-र्योल, और कोरिया क्रिश्चियन फेडरेशन के अध्यक्ष को क्युंग-ह्वान उपस्थित रहेंगे। कैथोलिक चर्च से सियोल के आर्चबिशप जोंग सून-टेक और कोरियन कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ली योंग-हून भाग लेंगे। इसके अलावा वॉन-बौद्ध धर्म के नासांग-हो, कन्फ्यूशियस धर्म के चोई जोंग-सू, चोंडो धर्म के पार्क इन-जून, और कोरियन नेशनल रिलिजियस एसोसिएशन के किम र्योंग-हा भी उपस्थित रहेंगे।

ब्लू हाउस की प्रवक्ता कांग यू-जंग ने बताया कि यह बैठक धार्मिक समुदायों की राय और सुझावों को सुनने के लिए आयोजित की गई है ताकि सामाजिक विश्वास और सहयोग को मजबूत किया जा सके। धार्मिक नेताओं ने राष्ट्रीय शांति और सद्भाव में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई, और आपसी सम्मान व अंतरधार्मिक संवाद पर जोर दिया। चर्चा का केंद्र सामाजिक विभाजन को दूर करने और नागरिकों के बीच एकता को बढ़ावा देने के उपायों पर रहेगा। प्रतिभागियों ने संघर्ष समाधान और समावेशी समाज निर्माण में धर्म की भूमिका पर भी अपने विचार साझा किए।

भविष्य में यह पहल अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकती है जो सामाजिक एकीकरण और राष्ट्रीय एकता की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सरकार और धार्मिक समुदायों के बीच सहयोग विश्वास और सम्मान का माहौल बनाने के लिए आवश्यक है। 2026 का यह कार्यक्रम कोरिया में अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा देने और साझा समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस बैठक के परिणाम सामाजिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं और कोरियाई समाज में धर्म की भूमिका को मजबूत कर सकते हैं।

एआई विश्लेषण से पता चलता है कि राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की राष्ट्र एकता के प्रति प्रतिबद्धता, धार्मिक नेताओं को सक्रिय रूप से शामिल करना, समावेशी और सक्रिय शासन रणनीति को दर्शाता है। ऐसे कार्यक्रम विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास के नेटवर्क बनाते हैं, तनाव को कम करते हैं और सामाजिक स्थिरता को बढ़ाते हैं। अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से, दक्षिण कोरिया धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, और संवाद की भूमिका को शांति और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण मानता है।


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🎯 metaqsol opinion:
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की पहल, जिसमें धार्मिक नेताओं को राष्ट्र एकता और सामाजिक विश्वास पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया, शासन का एक अभिनव दृष्टिकोण है। अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा देकर, दक्षिण कोरियाई सरकार सामाजिक एकता को मजबूत करने और संघर्ष को रोकने का प्रयास कर रही है। यह रणनीति अन्य देशों को सामाजिक चुनौतियों के समाधान में धार्मिक समुदायों को शामिल करने के लिए प्रेरित कर सकती है, और यह दर्शाती है कि आध्यात्मिकता और सहयोग समाज निर्माण में कितना महत्वपूर्ण है।

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