26 जून को उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री कू यून-चोल ने दक्षिण कोरिया की औद्योगिक आधार, उन्नत तकनीकी प्रतिस्पर्धा और K-संस्कृति जैसी ताकतों का उपयोग कर रणनीतिक आर्थिक सहयोग और वैश्विक गठजोड़ को मजबूत करने पर जोर दिया। 262वीं बाह्य आर्थिक मंत्रियों की बैठक में उन्होंने बढ़ती व्यापारिक बाधाओं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अस्थिरता और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया।
बैठक में कोरिया-चीन और कोरिया-जापान शिखर सम्मेलनों के आर्थिक परिणामों की समीक्षा की गई और आगे की कार्यवाहियों पर चर्चा हुई। अन्य चर्चाओं में कोरिया-चीन सांस्कृतिक सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों पर अंतरराष्ट्रीय रुझान, 2026 तक विदेशी संयंत्र अनुबंधों के लिए समर्थन योजनाएं और कोरिया-मिस्र व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की प्रगति शामिल थी।
कोरिया-चीन शिखर सम्मेलन के संबंध में, कू यून-चोल ने नौ वर्षों बाद द्विपक्षीय संबंधों की पूर्ण बहाली की सराहना की, जिससे समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों पर भविष्य के सहयोग की नींव रखी गई। उन्होंने विनिर्माण से उपभोक्ता वस्तुओं, कंटेंट और सेवाओं तक सहयोग के विस्तार को भी रेखांकित किया, जिससे जनता के लिए ठोस और व्यावहारिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।
आगे देखते हुए, दक्षिण कोरिया चीन के साथ सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करेगा, जापान के साथ आर्थिक सहयोग को गहरा करेगा और घरेलू कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों में जीत दिलाने के लिए सक्रिय समर्थन देगा, खासकर संयंत्र क्षेत्र में। इसके अलावा, देश महत्वपूर्ण खनिज प्रबंधन और मिस्र के साथ CEPA समझौते को अंतिम रूप देने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत की जा सके।
यह लेख दक्षिण कोरिया की वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने की रणनीतिक सोच को उजागर करता है, जिसमें तकनीकी नवाचार और सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का संयोजन है। K-संस्कृति को आर्थिक कूटनीति में शामिल करना एक दूरदर्शी कदम है, जिससे देश की वैश्विक प्रभावशीलता बढ़ सकती है। यह नीति अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है, जो विविध विकास साधनों और वैश्विक अस्थिरता के प्रति अपनी लचीलापन बढ़ाना चाहते हैं।