दक्षिण कोरिया की ग्रामीण विकास एजेंसी (RDA) ने फेनोटाइप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संयोजन से फसल गुण जांच की स्वचालित तकनीक विकसित की है। इस तकनीक का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के अनुकूल श्रेष्ठ किस्मों का त्वरित विकास करना है, जो आधुनिक कृषि के लिए अत्यंत आवश्यक है। पहले, फसल के आकार, रंग, मात्रा आदि की जांच शोधकर्ता स्वयं करते थे, जिससे समय और श्रम दोनों अधिक लगता था और परिणामों में अनुभवजन्य भिन्नता आ सकती थी।
जलवायु परिवर्तन के कारण खेती की परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं, जिससे अधिक फसलों और नमूनों की बार-बार जांच की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, RDA ने तीन वर्षों में 34 लाख से अधिक डेटा एकत्र कर छह प्रकार की स्वचालित जांच तकनीकें विकसित की हैं, जिनमें मशरूम की मात्रा, सोयाबीन पत्तियों की पहचान, सोयाबीन की वृद्धि का पूर्वानुमान, स्ट्रॉबेरी का आकार, सेब की गुणवत्ता और मक्का की ऊँचाई शामिल हैं। इन तकनीकों की सटीकता 90% से अधिक है।
इस तकनीक में सामान्य RGB कैमरा और विशेष हाइपरस्पेक्ट्रल कैमरा से डेटा एकत्र कर फसल के आकार, रूप, रोग की उपस्थिति और वृद्धि की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। पहले जहाँ यह प्रक्रिया एक सप्ताह तक चलती थी, अब औसतन 30 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है। स्वचालन से मानव श्रम की आवश्यकता कम होती है, परिणाम अधिक वस्तुनिष्ठ और दोहराने योग्य होते हैं।
RDA ने इन छह तकनीकों के लिए चार पेटेंट, एक शोध पत्र और एक कॉपीराइट भी पंजीकृत किया है। एजेंसी इन तकनीकों को शोधकर्ताओं और उद्योगों तक पहुँचाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीक हस्तांतरण की योजना बना रही है। इस तकनीक को कोरियाई गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘2025 पब्लिक एआई ग्रैंड चैलेंज’ में प्रोत्साहन पुरस्कार भी मिला है, जिससे इसके सार्वजनिक क्षेत्र में प्रभाव की पुष्टि होती है।
फेनोटाइप और एआई का यह संयोजन कृषि अनुसंधान के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। यह तकनीक समय और लागत की बचत के साथ-साथ परिणामों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाती है, जिससे कोरियाई कृषि अनुसंधान की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होती है। यह स्मार्ट और जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करती है।
फसल गुण जांच की स्वचालित तकनीक कृषि के डिजिटलीकरण में मील का पत्थर है। इससे अनुसंधान की लागत और समय में भारी कमी आती है और परिणाम अधिक सटीक व दोहराने योग्य होते हैं। यह नवाचार अन्य देशों के लिए भी कृषि आधुनिकीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।