[2026-01-23]कंबोडिया से 73 कोरियाई धोखेबाजों की सबसे बड़ी वापसी: 48.6 अरब KRW की धोखाधड़ी

दक्षिण कोरिया सरकार ने राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के निर्देश पर ट्रांसनेशनल क्राइम स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया। इस टीम ने कंबोडिया में स्थित एक बड़े घोटाले में शामिल 73 कोरियाई नागरिकों को प्रत्यर्पित करने का अभूतपूर्व अभियान चलाया, जिन्होंने 869 कोरियाई नागरिकों से लगभग 486 अरब वॉन की ठगी की थी। यह देश के इतिहास में सबसे बड़ा प्रत्यर्पण अभियान है। विशेष विमान आज रात इंचियोन हवाई अड्डे से रवाना होगा और 23 जनवरी सुबह 9:10 बजे वापसी करेगा।

जांच के दौरान सात स्कैम साइट्स की पहचान की गई, जिसमें दिसंबर में सिहानोकविल से 51, पोइपेट से 15 और मोंडोलकिरी से 26 अपराधियों को पकड़ा गया। प्रत्यर्पित लोगों में ‘रोमांस स्कैम’ गिरोह के सदस्य भी शामिल हैं, जिन्हें अक्टूबर में प्रत्यर्पित नहीं किया जा सका था। इन अपराधियों ने डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर 104 नागरिकों से 120 अरब वॉन की ठगी की और कानून से बचने के लिए प्लास्टिक सर्जरी तक करवाई।

इस समूह में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध करने वाले भगोड़े, निवेश विशेषज्ञ बनकर युवाओं और सेवानिवृत्त लोगों से 194 अरब वॉन की ठगी करने वाले, और बंधक बनाकर परिवारों से फिरौती वसूलने वाले अमानवीय अपराधी भी शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपर��धियों को विदेश में छोड़ना गलत संदेश देगा और पुनरावृत्ति की संभावना बढ़ाएगा, इसलिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज की गई।

सभी संदिग्धों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और देश लौटते ही उन्हें जांच एजेंसियों को सौंपकर कड़ी जांच व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार छिपी हुई संपत्ति का भी पता लगाकर अवैध कमाई की वसूली करेगी। स्पेशल टास्क फोर्स आगे भी कोरियाई नागरिकों को निशाना बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।

यह ऑपरेशन दिखाता है कि दक्षिण कोरिया अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रहा है। अपराधियों द्वारा डीपफेक जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से जांच और कानून व्यवस्था में नवाचार की आवश्यकता उजागर होती है। यह मामला अन्य देशों के लिए भी संगठित अपराध के खिलाफ रणनीति बनाने में उदाहरण बनेगा।


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🎯 metaqsol opinion:
यह मामला अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी नवाचार की आवश्यकता को रेखांकित करता है, खासकर जब अपराधी नई तकनीकों का दुरुपयोग कर रहे हैं। डीपफेक जैसी तकनीकों के खिलाफ जांच एजेंसियों को लगातार अपने तरीके अपडेट करने होंगे। दक्षिण कोरिया की सफलता अन्य देशों को भी वैश्विक संगठित अपराध से निपटने के लिए प्रेरित कर सकती है।

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