दक्षिण कोरिया कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने 2030 तक कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक श्रमिकों की हिस्सेदारी 60% तक बढ़ाने की योजना बनाई है। इसमें सार्वजनिक मौसमी श्रमिक कार्यक्रमों का विस्तार और विदेशी मौसमी श्रमिकों की भर्ती को मजबूत करना शामिल है, जिससे दीर्घकालिक मानव संसाधन आपूर्ति प्रणाली तैयार की जा सके।
कृषि, खाद्य और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में विदेशी मौसमी श्रमिकों की संख्या 92,104 तक पहुंच जाएगी, जो पिछले वर्ष नवंबर के 73,885 से 18,219 अधिक है। सार्वजनिक मौसमी श्रमिक केंद्रों की संख्या 90 से बढ़ाकर 130 की जाएगी, और 2030 तक 200 केंद्रों और 6,000 से अधिक श्रमिकों का लक्ष्य रखा गया है। श्रमिकों की सुरक्षा और वेतन की गारंटी के लिए बीमा अनिवार्य किया जाएगा।
सरकार मानव संसाधन प्रबंधन में सार्वजनिक संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करेगी, एकीकृत प्लेटफॉर्म और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करेगी। स्थानीय प्रशासन को फसल और क्षेत्र के अनुसार रोजगार की मांग की जानकारी दी जाएगी, और नए व अनुभवी श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। प्रमुख मौसमों में विदेशी श्रमिकों के त्वरित प्रवेश के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी।
सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों के लिए मोबाइल आधारित सुरक्षा चेकलिस्ट और वर्चुअल रियलिटी प्रशिक्षण लागू किया जाएगा। विदेशी श्रमिकों के लिए आवास की स्थिति में सुधार के लिए सार्वजनिक आवास निर्माण और मौजूदा सुविधाओं का नवीनीकरण किया जाएगा। निरीक्षण और उल्लंघन पर कार्रवाई को सख्त किया जाएगा, और कृषि श्रमिक सहायता एजेंसियों की भूमिकाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
दक्षिण कोरिया की यह योजना कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी की समस्या के लिए एक संरचित और नवाचारी समाधान प्रस्तुत करती है, जिसमें डिजिटलीकरण, प्रशिक्षण और श्रमिक अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है। यह मॉडल अन्य देशों के लिए भी मार्गदर्शक हो सकता है। दीर्घकाल में, ये उपाय कृषि को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनाएंगे।