दक्षिण कोरिया के समुद्री और मत्स्य मंत्रालय ने 2026-2030 के लिए चौथी मत्स्य रोग प्रबंधन योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के माध्यम से सुरक्षित मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। पिछले दस वर्षों में कोरिया की एक्वाकल्चर इंडस्ट्री में निरंतर वृद्धि हुई है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और प्रजातियों की विविधता के कारण नए रोगों का खतरा बढ़ गया है। 2007 से, कोरिया हर पांच साल में कानूनी रूप से अनिवार्य योजना बनाकर रोग प्रबंधन को सुदृढ़ कर रहा है। पिछली योजना (2021-2025) में निगरानी रोगों की सूची बढ़ाई गई और इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणन प्रणाली लागू की गई थी।
नई योजना के तहत, कोरिया मई 2024 में विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) द्वारा जीन डायग्नोस्टिक स्टैंडर्ड मटेरियल के लिए विश्व का पहला सहयोग केंद्र बनने के बाद, इस केंद्र का पूर्ण संचालन करेगा। राष्ट्रीय मत्स्य विज्ञान संस्थान और कृषि-खाद्य संगरोध सेवा इस केंद्र का संचालन करेंगे, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोग निदान के मानकीकरण के लिए आवश्यक सामग्रियों का विकास और वितरण करेंगे। इसके अलावा, रोगों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में पुनः वर्गीकृत किया जाएगा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रोग पूर्वानुमान तकनीक विकसित की जाएगी और नए टीके व उपचार विकसित किए जाएंगे।
संगरोध प्रणाली को ब्लॉकचेन आधारित ई-प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्नत किया जाएगा, 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र प्रणाली को तीन से आठ देशों तक विस्तारित किया जाएगा और AI आधारित दस्तावेज़ सत्यापन लागू किया जाएगा। क्षेत्रीय जोखिम के अनुसार अनुकूलित जैव सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे और वर्चुअल रियलिटी आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से मत्स्य पालन कर्मियों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाई जाएगी।
अंत में, एक स्वैच्छिक जैव सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें मत्स्य पालन प्रतिष्ठानों का मूल्यांकन और ग्रेडिंग की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के बाद, इस प्रणाली का विस्तार किया जाएगा ताकि मत्स्य पालकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। मत्स्य नीति निदेशक चोई ह्यून-हो के अनुसार, यह योजना जलवायु परिवर्तन और रोग प्रसार की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में मदद करेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व मत्स्य उद्योग की सुरक्षा को मजबूत करेगी।