दक्षिण कोरिया में नॉरोवायरस संक्रमण के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में 548 मामले दर्ज किए गए—पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक। कुल संक्रमितों में 0 से 6 वर्ष के बच्चों की हिस्सेदारी 39.6% है, जिससे यह आयु वर्ग विशेष रूप से संवेदनशील बन ग���ा है। स्वास्थ्य विभाग ने शिशु देखभाल केंद्रों, किंडरगार्टन और बच्चों के अन्य संस्थानों में स्वच्छता नियमों के पालन पर जोर दिया है। यह वृद्धि मौसमी प्रवृत्ति के अनुरूप है, क्योंकि नॉरोवायरस आमतौर पर नवंबर से मार्च के बीच फैलता है।
कोरिया रोग नियंत्रण और रोकथाम एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है: दिसंबर 2025 के दूसरे सप्ताह में 190, तीसरे में 240, चौथे में 262, जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में 354 और दूसरे सप्ताह में 548। आयु-आधारित वितरण: 0-6 वर्ष (39.6%), 7-18 वर्ष (24.8%), 19-49 वर्ष (17.7%), 50-64 वर्ष (5.7%), 65 वर्ष से अधिक (12.2%)। 2025 में, 61.8% पुष्ट संक्रमण मानव-से-मानव संपर्क से हुए, जिनमें से 71.4% शिशु संस्थानों में पाए गए।
नॉरोवायरस मुख्य रूप से दूषित पानी या भोजन से फैलता है, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के संपर्क या उल्टी के दौरान निकलने वाली बूंदों से भी फैल सकता है। लक्षण 12-48 घंटे के भीतर प्रकट होते हैं, जिनमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, ठंड लगना और बुखार शामिल हैं। अधिकारियों ने सलाह दी है कि भोजन अच्छी तरह पकाएं, साबुन से कम से कम 30 सेकंड तक हाथ धोएं और सतहों की नियमित सफाई करें, खासकर बच्चों के संपर्क वाले स्थानों पर।
संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए, मरीजों को लक्षण खत्म होने के 48 घंटे बाद तक घर पर रहना चाहिए और अलग स्थान पर रहना चाहिए। शिशु देखभाल संस्थानों में खिलौनों और सतहों की सफाई और सैनिटाइजेशन बढ़ाना चाहिए। रोग नियंत्रण एजेंसी ने माता-पिता और शिक्षकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों को सही तरीके से हाथ धोने और व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतें सिखाएं।
नॉरोवायरस का यह प्रकोप सामूहिक वातावरण में छोटे बच्चों की संवेदनशीलता को उजागर करता है और सख्त रोकथाम उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। आंकड़े बताते हैं कि मानव-से-मानव संक्रमण, विशेष रूप से शिशु संस्थानों में, प्रमुख मार्ग है। स्वच्छता दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन और अभिभावकों व शिक्षकों में जागरूकता बढ़ाना भविष्य में संक्रमण को नियंत्रित करने और संवेदनशील समूहों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।