[2026-01-18]दक्षिण कोरिया में बाल संरक्षण कानून में बदलाव, अस्थायी संरक्षक की भूमिका मजबूत

दक्षिण कोरिया के स्वास्थ्य और कल्याण मंत्रालय ने 16 फरवरी को बाल कल्याण अधिनियम के कार्यान्वयन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया, जिस पर 25 फरवरी तक सार्वजनिक राय मांगी गई है। इस संशोधन का उद्देश्य पालक देखभाल में बच्चों के लिए संरक्षक नियुक्त होने तक सुरक्षा में कोई अंतराल न रहे, इसलिए पालक माता-पिता को अस्थायी संरक्षक की भूमिका निभाने की अनुमति दी गई है। यह कदम बच्चों की निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करता है और राज्य की जिम्मेदारी को मजबूत करता है।

संशोधन में बाल अधिकार संरक्षण संस्थान का नाम बदलकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण संस्थान करने का भी प्रस्ताव है। अस्थायी संरक्षक बच्चों के लिए सर्जरी जैसी महत्वपूर्ण सहमति दे सकते हैं, जिसकी अधिकतम अवधि एक वर्ष होगी। यदि आधिकारिक संरक्षक की नियुक्ति में देरी, गंभीर बीमारी या अचानक स्कूल परिवर्तन जैसी परिस्थितियां हों, तो अवधि बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय प्रशासन अस्थायी संरक्षक से रिपोर्ट मांगकर उनके अधिकारों के दुरुपयोग की निगरानी कर सकेगा।

इसके अलावा, संशोधन में पालक देखभाल करने वालों को कानूनी प्रक्रिया में सहायता के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण संस्थान के निदेशक द्वारा कानूनी परामर्श देने का प्रावधान है। विकलांगता क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए भी स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं—उन्हें विकलांगता कल्याण अधिनियम के तहत योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए। वार्षिक बाल शोषण रिपोर्ट में अब विकलांग बच्चों से संबंधित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे।

मंत्रालय 25 मार्च तक बाल नीति विभाग या राष्ट्रीय जन भागीदारी विधायी केंद्र के माध्यम से सुझाव आमंत्रित करेगा। इसके बाद अंतिम संशोधन पारित किया जाएगा। ये बदलाव दक्षिण कोरिया में कमजोर बच्चों की कानूनी और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ अस्थायी संरक्षक की भूमिका पर निगरानी भी बढ़ाएंगे।


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🎯 metaqsol opinion:
यह संशोधन दक्षिण कोरिया में पालक देखभाल बच्चों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें अस्थायी संरक्षक की भूमिका को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है। विशेषज्ञ मानदंडों और कानूनी सहायता के प्रावधान से समावेशी और व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है। ये उपाय अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं, जो कमजोर बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं।

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