दक्षिण कोरिया के रोजगार और श्रम मंत्रालय ने 14 जनवरी को घोषणा की कि पिछले वर्ष की कार्यसमिति को पुनर्गठित कर एक निगरानी टीम बनाई गई है, जो सरकार, श्रमिकों और नियोक्ताओं के त्रिपक्षीय संयुक्त घोषणा में तय लक्ष्यों की जिम्मेदारी से निगरानी करेगी। यह कदम 2023 में समाप्त हुई कार्यसमिति की गतिविधियों के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य वास्तविक श्रम समय घटाने के लिए रोडमैप तैयार करना था। नई निगरानी टीम में पूर्व सदस्य और विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि चर्चा की निरंतरता और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जा सके।
24 सितंबर 2023 को गठित कार्यसमिति ने तीन महीनों में 25 बैठकें कीं, जिसके बाद 30 दिसंबर 2023 को रोडमैप और संयुक्त घोषणा जारी की गई। इस वर्ष निगरानी टीम कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी, रात्रिकालीन श्रमिकों की स्थिति का सर्वेक्षण करेगी और श्रम समय से छूट या विशेष उद्योगों का विश्लेषण करेगी। पहली बैठक में टीम के संचालन की योजना और 936.3 अरब वॉन के सरकारी सहायता कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
मंत्रालय 1,12,000 श्रमिकों को 462.4 अरब वॉन की सहायता देगा, जिसमें ‘वर्क-लाइफ बैलेंस+4.5’ जैसी नई परियोजना के माध्यम से वेतन में कटौती किए बिना सप्ताह में 4.5 दिन कार्य प्रणाली अपनाने वाली कंपनियों को प्रति कर्मचारी सालाना अधिकतम 7.2 लाख वॉन की सहायता मिलेगी। अस्पताल, शिफ्ट परिवर्तन करने वाली कंपनियों, गैर-राजधानी क्षेत्रों और नए भर्ती करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त सहायता मिलेगी, साथ ही 200 कंपनियों को उपस्थिति प्रबंधन के लिए आईटी सिस्टम लगाने के लिए अधिकतम 1 करोड़ वॉन तक का समर्थन मिलेगा।
इसके अलावा, 1,705 कंपनियों को 463 अरब वॉन की सहायता दी जाएगी ताकि प्रमुख उद्योगों जैसे सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल और शिपबिल्डिंग में एआई आधारित सिस्टम लागू कर उत्पादकता बढ़ाई जा सके। सरकार 2030 तक 12,000 स्मार्ट फैक्ट्रियों की स्थापना और बड़ी कंपनियों व एसएमई के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करेगी। साथ ही, 10.9 अरब वॉन का निवेश श्रमिकों के लिए अवकाश कोष और किफायती पर्यटन सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
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दक्षिण कोरिया की यह नीति वित्तीय सहायता, तकनीकी नवाचार और सामाजिक संवाद का समन्वित उदाहरण है। एआई का औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग उत्पादकता बढ़ाने के साथ श्रमिकों के लिए बेहतर कार्य-जीवन संतुलन सुनिश्चित करता है। त्रिपक्षीय सहयोग और सख्त निगरानी से यह सुनिश्चित होता है कि सुधार केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रभावी हों।