24 जनवरी को दक्षिण कोरिया के ग्योंगगी प्रांत के पोचियोन स्थित एक सुअर फार्म में अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई, जहां 7,945 सुअर पाले जा रहे थे। यह इस साल देश में तीसरा पुष्ट मामला है, इससे पहले 23 जनवरी को अंसोंग में मामला सामने आया था। कृषि, खाद्य और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय ने उपमंत्री किम जोंग-गु के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ आपात बैठक कर स्थिति का मूल्यांकन और रणनीति बनाई।
पुष्टि मिलते ही त्वरित प्रतिक्रिया टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने फार्म में बाहरी लोगों और वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई। संक्रमित फार्म के सभी 7,945 सुअरों को मार दिया गया और तत्काल सैनिटाइजेशन व महामारी जांच शुरू की गई। इसके अलावा, नौ आस-पास के शहरों और जिलों में सुअर पालन से जुड़े कर्मचारियों और वाहनों के लिए 24 घंटे की अस्थायी मूवमेंट स्टॉप का आदेश दिया गया।
सरकार ने 48 सैनिटाइजेशन संसाधनों को तैनात कर 323 सुअर फार्म और आस-पास की सड़कों की गहन सफाई कराई। संक्रमित फार्म के 10 किमी दायरे में 56 फार्म, 29 संबंधित फार्म और 4 वाहनों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारी उन क्षेत्रों में भी सतर्कता बरतने पर जोर दे रहे हैं, जहां जंगली सूअरों में बीमारी नहीं मिली है।
7,945 सुअरों का वध राष्ट्रीय स्तर पर कुल सुअर संख्या का 0.07% से भी कम है, जिससे पोर्क सप्लाई पर असर नगण्य रहेगा। सरकार स्थिति की सतत निगरानी और बायोसेफ्टी उपायों को अपडेट करती रहेगी, साथ ही स्थानीय प्रशासन और किसानों से सहयोग की अपील कर रही है।
यह घटना पशुजन्य संक्रामक रोगों के प्रबंधन में बायोसेफ्टी की अहमियत को दर्शाती है। दक्षिण कोरिया की त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया—जिसमें सुअरों का वध, व्यापक सैनिटाइजेशन और मूवमेंट कंट्रोल शामिल है—ASF के प्रसार को रोकने का प्रभावी मॉडल है। भविष्य में उन्नत निगरानी तकनीकों और किसानों की सतत ट्रेनिंग से सुअर पालन उद्योग की रोग प्रतिरोधक क्षमता और बढ़ सकती है।